ए) कोई भी व्यक्ति जो उत्पादों के उत्पादन / निर्माण या सेवाओं को प्रदान करने / प्रस्तुत करने में लगे माइक्रो, लघु और मध्यम उद्यम को स्थापित करना चाहता है, वह जिला उद्योग केंद्र में उद्यमी के ज्ञापन के भाग -1 को दर्ज कर सकता है, जिसका नेतृत्व जनरल प्रबंधक (डीआईसी)।
बी) नए एमएसएमईडी अधिनियम, 2006, "उद्योग" शब्द को देश में सेवा क्षेत्र के उद्यमों के महत्व पर जोर देने के लिए "एंटरप्राइज़" द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है। इस अधिनियम के तहत, उद्यमों को व्यापक रूप से दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है जैसे कि:
i) विनिर्माण उद्यम
ii) सेवा उद्यम।
i) विनिर्माण उद्यमों को संयंत्र और मशीनरी (भूमि और भवनों को छोड़कर) में निवेश के संदर्भ में परिभाषित किया गया है और आगे वर्गीकृत किया गया है:
* माइक्रो एंटरप्राइजेज - रुपये तक निवेश 25 लाख।
* छोटे उद्यम - रुपये से ऊपर निवेश 25 लाख और रु। 5 करोड़।
* मध्यम उद्यम- 5 करोड़ रुपये से ऊपर और 10 करोड़ रुपये तक का निवेश।
ii) सेवा उद्यम - उपकरण में उनके निवेश के संदर्भ में परिभाषित किया गया है और आगे वर्गीकृत:
* माइक्रो एंटरप्राइजेज - 10 लाख रुपये तक निवेश।
* छोटे उद्यम - 10 लाख रुपये से ऊपर और 2 करोड़ रुपये तक
* मध्यम उद्यम - रुपये से ऊपर 2 करोड़ और 5 करोड़ रुपये तक
इंडस्ट्रीज, ट्रेड एंड कॉमर्स के निदेशक, साथ ही, महाप्रबंधक (डीआईसी) को परियोजना रिपोर्ट और अन्य प्रासंगिक जानकारी की मांग करने का अधिकार सुरक्षित है ताकि विनिर्माण प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के प्रकार, मशीनरी शामिल हो और इकाई के अन्य पहलुओं।
ईएम -1 ऑनलाइन पंजीकरण:पंजीकरण करने के लिए यहां क्लिक करें।




